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प्रातः वंदना

  • लेखक की तस्वीर: SS Malik
    SS Malik
  • 26 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 30 अप्रैल


ब्रह्म से आत्मा का मिलन ही योग है । ब्रह्म से संपर्क के लिए प्रार्थना या वंदना आवयशक है । प्रातः वंदना का एक क्रम है । इसमे सर्वप्रथम हम अपने गुरुओं की वंदना करते हैं , तत्पश्चात पित्रों की, गणपती की, प्रकट देव श्री रामदूत हनुमान की , सूर्य देव की आराधना करते हैं । इसके बाद ईश्वरों की आराधना मे सरस्वती ब्रह्मा, लक्ष्मी विष्णु तथा शक्ति और शिव की स्तुति है । ये सब ईश्वर रूप परमेश्वर के ही घटक हैं । अंत मे शांति मंत्र आता है । शांत का अर्थ है जिसका श में अंत होता हो । शिव श ही है, शून्य भी श ही है, वही परब्रह्म परमेश्वर है ।


क्रमानुसार ये मंत्र निम्नलिखित हैं ।


ॐ श्री गुरुवे नमः।

 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः ।गुरुरेव परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

 

 

ॐ  पितृ देवायै नम:।

 

ॐ पितृभ्यो नमः।


 

ॐ गं गणपतये नमः।

 

ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

 

 

ॐ श्री राम दूताय नमः ।

 

ॐ हं हनुमते नमः॥

 

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।

 


ॐ सूर्याय नमः ।

ॐ मित्राय नमः।

ॐ रवये नमः।

ॐ भानवे नमः।

ॐ खगाय नमः।

ॐ पूष्णे नमः।

ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।

ॐ मरीचये नमः।

ॐ आदित्याय नमः।

ॐ सवित्रे नमः।

 

 

नमः सूर्याय शान्ताय सर्वरोग निवारिणे

आयु रोग्य मैस्वैर्यं देहि देवः जगत्पते ।

 


ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः।

 

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

 


ॐ ब्रह्मणे नमः ।

 

ॐ नमस्ते परमं ब्रह्मा नमस्ते परमात्ने। निर्गुणाय नमस्तुभ्यं सदुयाय नमो नम:।।

 

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि। धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त्॥


 

ॐ लक्ष्मी नम:।

 

वन्दे पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां

हस्ताभ्यां अभयप्रदां मणिगणैर्नानाविधैर्भूषिताम्।

 

 

ॐ विष्णवे नमः ।

 

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।

 

ॐ नमो नारायणाय।

 

शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्।

विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।

लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्।

वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

 

 

ॐ श्रीं नमः ।

 

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥

 

 

ॐ नमः शिवाय ।

 

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि॥

 


 

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी

शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः।

वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं

शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

 
 
 

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