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प्रातः वंदना
ब्रह्म से आत्मा का मिलन ही योग है । ब्रह्म से संपर्क के लिए प्रार्थना या वंदना आवयशक है । प्रातः वंदना का एक क्रम है । इसमे सर्वप्रथम हम अपने गुरुओं की वंदना करते हैं , तत्पश्चात पित्रों की, गणपती की, प्रकट देव श्री रामदूत हनुमान की , सूर्य देव की आराधना करते हैं । इसके बाद ईश्वरों की आराधना मे सरस्वती ब्रह्मा, लक्ष्मी विष्णु तथा शक्ति और शिव की स्तुति है । ये सब ईश्वर रूप परमेश्वर के ही घटक हैं । अंत मे शांति मंत्र आता है । शांत का अर्थ है जिसका श में अंत होता हो । शिव श ही
SS Malik
26 अप्रैल2 मिनट पठन


भारत का स्व तंत्र संविधान
हमारा वर्तमान राष्ट्रीय संविधान विदेशी सिद्धांतों पर आधारित है आऊर यह हमारा तंत्र नहीं है इसलिए इसे स्व तंत्र नहीं कहा जा सकता। इसी कारण से भारत अभी स्वाधीन है परन्तु स्व तंत्र नहीं । वर्षों से हम रिपब्लिक दिवस मानते आए हैं परन्तु भारत न ही तो एक रिपब्लिक है और न ही गणतंत्र । भारत की राज्य व्यवस्था जनतंत्र का एक परिवर्तित स्वरूप दल तंत्र या पार्टी तंत्र है । मेरी पुस्तक "भारत का स्व तंत्र संविधान" एक विवेचनात्मक रचना है जो प्राचीन भारतीय दर्शन और शास्त्रों के ज्ञान के परिप्र
SS Malik
17 मार्च1 मिनट पठन
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